Mahobbat ka Asar

ये महोब्बत है जनाब, बहोत बुरा हाल करती है

Posted by Pushkar Prashar ( Sahil )

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पूछ रही रूह मेरी खुद से आज
कि तूने भी कभी महोब्बत की थी,🤔🤔
खुद को किसी ओर के लिए बर्बाद कर
क्या तुमने भी काफिरों वाली ज़िन्दगी जी थी ? 🤫🤫

ये हाल बेहाल महोब्बत करती है,
फिर क्या जीना और क्या मरना
बहोत बुरा हाल करती है,😲😲
खुद पे बीते हादसों को भी
मैंने खुद में छुपा लिया
पर किसी गैर अपने ने
मेरी आँखें पढ़ मेरा हाल बता दिया । 😔😔
दिखा के फिर वही ख़्वाब
मेरा वक़्त ज़ाया करती है
ये महोब्बत है जनाब
बहोत बुरा हाल करती है ।😲😲

हम भी कभी खुल के हंसते थे ,
ज़िन्दगी को अपने हिसाब से जिया करते थे ,😐😐
एक पल में वो सब बिखर गया है
एक पल में सब कुछ उजड़ गया
बस कुछ ऐसा खुदा का कहर हुआ ,😢😢
सुना है वो आज भी याद करती है
ये महोब्बत है, जनाब
बहोत बुरा हाल करती है ।😱🤫😲

मेरे अब पास कुछ खास बचा नहीं,
मेरा हाल अब कोई पूछता नहीं
शायद वो भी मजबूर रही हो हालातों से ,
याद आते है वो किस्से उसकी बातों के , 🙄😦
उन वादों का अब कत्ल हुआ
हम जिन वादों के सहारे थे ,
अब समझ आता है
क्यों ज़ुबाँ पे उसके ताले थे ! 🤐🤐

ये इश्क़ तेरा कोई कहर नहीं
जो सब कुछ याद दिलाता है
साहिल अनजाने में तुझसे
ये सब कुछ दर्द लिखाता है ✍✍

अब देख उसे रकीब के साथ
दिल की बेचैनी सी बढ़ती है
ये महोब्बत है जनाब
बहोत बुरा हाल करती है।🤫😲🙄🤔🤔

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