Hamsafar

EK dil ki kahani

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हमसफर


मैं बहती हवा सा था कभी
वो हवा में नमी सी ,
हसीन मौसम का मिज़ाज़ था
महसूस होती है अब कमी सी ।

कि झुलसती धूप में वो
किसी राहत सी ,
मेरी मंज़िल को जाते रास्तों में
वो आज भी किसी आहट सी ।

कि दिल की बेचैनियों में
वो किसी तिलमिलाहट सी ,
मेरी रूह को मिलते सुकून में
वो किसी चाहत सी

जुदा जो हुए हम मग़र
ए मेरे हमसफर
तेरे लफ्ज़ , तेरा किरदार ,
तेरा हुस्न ए हसीन
सताते हैं ख्याल अब भी मुझे
होती है तुझे पाने की चाहत सी ।।

Writer:Pushkar

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